इसका अर्थ है कि जो चीज़ हमें नहीं मिलती, वह चीज़ हमें ज्यादा मुल्यवान लगती है। जो मछली हम पकड़ नहीं पाते। वह हमें जांध जैसे मोटी लगती है। ये हाना अगुंर खट्टे है के विपरीत भाव व्यक्त करती है।
भागे मछरी जांध असन मोंठ
Published by Sanjeev Tiwari
ठेठ छत्तीसगढ़िया, पेशे से वकील, दिल से पत्रकार। छत्तीसगढ़ी भाषा की पहली वेब मैग्जीन और न्यूज पोर्टल का संपादक। छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति व साहित्य को बूझने के लिए निरंतर प्रयासरत. .. View more posts
